फिर एक रात
जो गुज़रती नहीं
चुभो जाती है बस एक सवाल "गलती किसकी?"
रंजिशें कहूँ या बेबसी,फर्क अब मैं समझती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
याद आता है जब वो
तुझे तकलीफ दूं या खुद को करूँ परेशान
बात तो है मेरे लिए एक ही
खिलखिलाहटों की भी कुछ हैं बाकी
जो आज भी मिटती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
हँस के कहते थे की
जान भी ले जाओगे तो क्या गम है
जान से ज्यादा ले जाओगे ,इस का अंदाजा भी कहाँ था
भीड़ में रहकर भी
भीड़ में मैं रहती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
कितना समझाया खुद को की
नहीं है ज़रुरत मुझे तेरी
पर तेरी आदत की आदत
आज भी बदलती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
दिन भर को भूल जाती हूँ तुझे
इस बाहर के शोर में कहीं
पर होते-होते महसूस होता है की
एक हिस्सा मेरा आज भी तेरे पास है
दिन तो कट जाता है बस
रात ये ढलती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
जो गुज़रती नहीं
चुभो जाती है बस एक सवाल "गलती किसकी?"
रंजिशें कहूँ या बेबसी,फर्क अब मैं समझती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
याद आता है जब वो
तो हौसला जैसे दो पल को टूट जाता है मेरा
छिल जाती है रूह तक मेरी
ख़ामोशी बयान करती है,बस लफ्ज़ अब कुछ कहते नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
छिल जाती है रूह तक मेरी
ख़ामोशी बयान करती है,बस लफ्ज़ अब कुछ कहते नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
तुझे तकलीफ दूं या खुद को करूँ परेशान
बात तो है मेरे लिए एक ही
खिलखिलाहटों की भी कुछ हैं बाकी
जो आज भी मिटती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
हँस के कहते थे की
जान भी ले जाओगे तो क्या गम है
जान से ज्यादा ले जाओगे ,इस का अंदाजा भी कहाँ था
भीड़ में रहकर भी
भीड़ में मैं रहती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
कितना समझाया खुद को की
नहीं है ज़रुरत मुझे तेरी
पर तेरी आदत की आदत
आज भी बदलती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
दिन भर को भूल जाती हूँ तुझे
इस बाहर के शोर में कहीं
पर होते-होते महसूस होता है की
एक हिस्सा मेरा आज भी तेरे पास है
दिन तो कट जाता है बस
रात ये ढलती नहीं
हाँ,फिर वही रात
जो गुज़रती नहीं
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