मासूमियत भी कितनी ज़रूरी है न?
हाँ ,अपने लिए ही
कभी ऐसा भी हो की जब वो कहे
"हाँ मुझे फ़िक्र है तुम्हारी "
तो बिना सोचे समझे यकीन कर लूं
ऐसा भी हो की ये ख्याल न आये की
"कहीं इसके पीछे इसका कोई मकसद तो नहीं ?"
हो ऐसा भी की जब वो हाथ आगे बढाए
और पूछे "चलोगी साथ?"
तो बिना सोचे समझे यकीन कर लूं
ऐसा भी हो की कभी न लगे
"ये तो वो है ही नहीं"
हो भी की जब वो बाँहों में समेटे मुझसे कहे
"कहीं नहीं जा रहा तुम्हे छोडकर "
तो मैं उसकी आँखों में देखकर
उस हर लफ्ज़ को सच मान लूं
हाँ ,अपने लिए ही
कभी ऐसा भी हो की जब वो कहे
"हाँ मुझे फ़िक्र है तुम्हारी "
तो बिना सोचे समझे यकीन कर लूं
ऐसा भी हो की ये ख्याल न आये की
"कहीं इसके पीछे इसका कोई मकसद तो नहीं ?"
हो ऐसा भी की जब वो हाथ आगे बढाए
और पूछे "चलोगी साथ?"
तो बिना सोचे समझे यकीन कर लूं
ऐसा भी हो की कभी न लगे
"ये तो वो है ही नहीं"
हो भी की जब वो बाँहों में समेटे मुझसे कहे
"कहीं नहीं जा रहा तुम्हे छोडकर "
तो मैं उसकी आँखों में देखकर
उस हर लफ्ज़ को सच मान लूं
beautiful...its very beautiful
ReplyDeleteThank you Vikas :)
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