कार रुकी । कार में से 4 लोग उतरे। दीनानाथ जी ,उनकी धर्मपत्नी सुमेधा जी, उनका बेटा अखिल और उनकी बहु मधु ।
दीनानाथ जी और सुमेधा जी डबडबायी आँखों से वो उस इमारत को देख रहे थे जहाँ आने की कल्पना उन्होंने सपने में भी नहीं की थी।वो शहर के एक वृद्धाश्रम के सामने खड़े थे । दोनों वृद्ध पति-पत्नी यही सोच रहे थे की क्या गुनाह कर दिया था उन्होंने , कि उन्हें ये दिन देखना पड़ा,क्या कमी रह गयी थी उनके प्यार में? आर्थिक तंगी के बावजूद भी अपने बेटे को पढ़ा-लिखा कर डॉक्टर बनाया था और जब बेटे ने कहा की वो अपनी पसंद से शादी करेगा, तब भी उन्होंने बिलकुल मना नहीं किया। मधु एक उच्च परिवार की लड़की थी और सुमेधाजी तो उसे पलकों पे रखती । घर का एक काम मधु को नहीं करना पड़ता बल्कि सुमेधा जी ही घर का सारा काम करती।उस रात,मधु ने अखिल से कहा " या तुम अपने माँ बाप के साथ रहो या मेरे साथ, या वृद्धाश्रम के कागजात पर दस्तखत करो या हमारे तलाक् के कागजात पर,आज ही फैसला हो जाए इस बात का !!" सुमेधा जी सुन रही थी सब। पर बटे की बसी बसाई शादी पर आंच कैसे आने देती वो?इसीलिए वृद्धाश्रम जाने का फैसला ले लिया था उन्होंने।
चारों अन्दर की तरफ बढ़ रहे थे। बस कुछ कागजात दस्तखत करने थे,फिर दीनानाथ जी और सुमेधा जी का ठिकाना वृद्धाश्रम था । दीनानाथ जी को याद आ रहा था जब अखिल आठ साल का था और जब उसका एक्सीडेंट हुआ थे तो वो किस तरह हर अस्पताल उसे गोद में उठाये दौड़ रहे थे और सुमेधा जी ने तो अखिल की पढाई के लिए अपने पुश्तैनी जेवरात भी गिरवी रख दिए थे। क्या कुछ नहीं किया था उन्होंने अखिल के लिए? दीनानाथ जी तो खुद को संभाल रहे थे पर सुमेधा जी? माँ का कलेजा था ,दूर कैसे रह पाती अपने बच्चे से??
भरी आँखों से अखिल को देख रही थी, न जाने कब उसे देखना नसीब हो ?
ऑफिस पहुँच गए थे चारों। मधु ने अखिल की कागज़ात बढ़ाये और कहा कर दो दस्तखत ! अखिल के हाथ काँप रहे थे । फिर उसने किसी तरह उन पर हस्ताक्षर कर दिए और मधु के हाथ में वो पन्ने पकड़ा दिए, मधु फूली नहीं समां रही थी। पर ये क्या??? ये तो तलाक के कागजात थे!!
अखिल ने मधु की ओर देखा और गरज कर बोला " तुम्हे यदि मेरे माँ-बाप के साथ नहीं रहना तो तुम अलग हो सकती हो ! अगर तुम मेरे माँ-बाप की इज्ज़त नहीं कर सकती तो तुम मेरे साथ रहने के काबिल नहीं हो। " अखिल ने अपने माँ-बाप की तरफ देखा और कहा "चलो माँ-बाबा ,घर चलते हैं "। दोनों वृद्ध पति-पत्नी फूट-फूट कर रोने लगे ।ये ख़ुशी के आंसू थे , उन्हें अपना बेटा "वापिस" जो मिल गया था।
अखिल ने मधु की ओर देखा और गरज कर बोला " तुम्हे यदि मेरे माँ-बाप के साथ नहीं रहना तो तुम अलग हो सकती हो ! अगर तुम मेरे माँ-बाप की इज्ज़त नहीं कर सकती तो तुम मेरे साथ रहने के काबिल नहीं हो। " अखिल ने अपने माँ-बाप की तरफ देखा और कहा "चलो माँ-बाबा ,घर चलते हैं "। दोनों वृद्ध पति-पत्नी फूट-फूट कर रोने लगे ।ये ख़ुशी के आंसू थे , उन्हें अपना बेटा "वापिस" जो मिल गया था।