उसका अलग हो जाना आसान सा लगा पहले
पर बाद में सांस लेना भी मुश्किल सा लगने लगा
कहाँ जानती थी की मेरे मन में अधूरेपन की
खाई बना जायेगा वो ?
साथ उसके सबकुछ पूरा लगता
पर जब आँख भरी हो तो
पूरा चाँद भी अधूरा लगता है
हर बार लगता दौड़ जाऊं उसके पास
पर कभी-कभी प्यार भी बेसहारा हो जाता है
कभी-कभी आपको अलग तब होना पड़ता है
जब आप जानते हैं की
वो आपकी रगों में दौड़ रहा होता है
हर याद जब आँखों के सामने लुका-छिपी खेलती है
तब महसूस होता है
"शायद ये वही था"
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